पुराने विभाग फिर सौंपे गए, अब अधूरे सपनों को पूरा करने की बारी | विजय और दिलीप पर CM का सबसे ज्यादा भरोसा
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बिहार मंत्रिमंडल विस्तार में कई मंत्रियों को उनके पुराने विभाग वापस मिले हैं।
इसका उद्देश्य प्रशासनिक अनुभव का लाभ उठाते हुए अधूरे राजनीतिक और विकासात्मक एजेंडों को पूरा करना है।
राज्य ब्यूरो, पटना। सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार (Bihar Cabinet Expansion) में कई मंत्रियों को फिर से उनके पुराने विभाग सौंपे जाने के पीछे केवल प्रशासनिक अनुभव ही नहीं, बल्कि अधूरे राजनीतिक और विकासात्मक एजेंडों को पूरा करने की रणनीति भी मानी जा रही है।
भाजपा और सहयोगी दलों के कई ऐसे चेहरे हैं, जिन्होंने पूर्व में अपने विभागों में कुछ महत्वाकांक्षी योजनाएं शुरू की थीं, लेकिन राजनीतिक बदलाव, विभागीय फेरबदल या सरकार परिवर्तन के कारण वे योजनाएं अधूरी रह गई थीं।
अब दोबारा वही जिम्मेदारी मिलने से इन मंत्रियों को अपने पुराने विजन को जमीन पर उतारने का अवसर मिल सकता है। ऐसे मंत्रियों में पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय सिन्हा एवं राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल से जनता के सर्वाधिक उम्मीद है।
वैसे तो कुल 14 मंत्री ऐसे है जिन्हे पुन: पुराने में विभाग मिले हैं, लेकिन इसमें विजय एवं दिलीप ऐसे जिन्हें लंबे अंतराल के उपरांत फिर पुराने विभाग का दायित्व मिला है।
भाजपा में घटा विजय सिन्हा का कद
हालांकि, विजय सिन्हा (Bihar Minister Vijay Sinha) का कद भाजपा सरकार में घट गया है। पार्टी ने जहां अन्य मंत्रियों दो-दो विभाग का दायित्व दिया है। वहीं, विजय को महज एक विभाग देना इस बात का संदेश है कि संगठन एवं सरकार में विजय का महत्व कम हुआ है।
प्रशासनिक सुधारों को मिलेगी नई गति
उधर, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कई मंत्री अपने विभागों में पहले से लंबित परियोजनाओं, अधूरी घोषणाओं एवं प्रशासनिक सुधारों को नई गति देने की तैयारी में हैं।
खासकर ग्रामीण विकास, कृषि, पंचायतीराज, गन्ना उद्योग, पीएचईडी, अल्पसंख्यक कल्याण, लघु जल संसाधन विभागों में पूर्व अनुभव रखने वाले नेताओं को फिर से जिम्मेदारी दिए जाने को सरकार की अनुभव आधारित प्रशासन की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे विभागों में शुरुआती भ्रम की स्थिति भी कम होगी और फैसलों की गति तेज होने की संभावना है।
हालांकि, भाजपा कोटे से जुड़े अन्य सहयोगी दलों के मंत्रियों के विभाग में कोई परिवर्तन नहीं कर पार्टी चाहती है कि जिन मंत्रियों की अपने विभागों में पहले सकारात्मक छवि रही है, वे अधूरे कार्यों को पूरा कर जनता के बीच फिर मजबूत संदेश दे सकें।
कई मंत्रियों ने पहले दिन ही अपने पुराने विभागों की समीक्षा की। अधिकारियों के साथ लंबित योजनाओं में तेजी लाने एवं जनता की शिकायत दूर करने के निर्देश दिए।
सत्ता गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ मंत्री अपने पिछले कार्यकाल में राजनीतिक या प्रशासनिक कारणों से जिन योजनाओं को पूरा नहीं करा पाए थे, उन्हें अब प्रतिष्ठा के रूप में आगे बढ़ाएंगे। ऐसे में यह मंत्रिमंडल विस्तार केवल चेहरों का बदलाव नहीं, बल्कि पुराने अधूरे संकल्पों को पूरा करने की नई राजनीतिक और प्रशासनिक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
